Surguja के Laxmi Narayan Hospital पर गंभीर सवाल
छत्तीसगढ। अवैध बिल्डिंग में संचालित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को सरगुजा जिले के नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी के द्वारा भी नोटिस जारी किया गया है. नोडल अधिकारी ने उन्हें इस आधार पर नोटिस जारी किया है कि अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर मापदंड के विरुद्ध है. ऑपरेशन थिएटर के बीचो-बीच पिलर स्थित है ऐसे में ऑपरेशन के दौरान इमरजेंसी पड़ने पर डॉक्टर और स्टाफ को काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो दूसरी तरफ ऑपरेशन थिएटर में रखे गए उपकरणों को मूव करने में भी परेशानी होती है. यही वजह है कि नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल को यह नोटिस जारी किया गया है. दूसरी तरफ ऑपरेशन थिएटर जितने क्षेत्रफल में होना चाहिए उससे कम क्षेत्रफल में है. मतलब मरीजों के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।
अस्पताल को नोटिस जारी किया गया
सरगुजा जिले के नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डा पीके सिन्हा ने बताया कि लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को उनके द्वारा नोटिस जारी किया गया. उनसे जवाब मांगा गया कि आखिर आपका ऑपरेशन थिएटर मापदंड के हिसाब से नहीं बना है ऐसे में क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए. डॉ पीके सिन्हा ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर के अलावा पार्किंग को लेकर भी समस्या है. इस अस्पताल को हम परफेक्ट नहीं बता सकते हैं. यहां कई कमियां हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने हमसे नोटिस का जवाब देते हुए वक्त मांगा. ऑपरेशन थिएटर के बाहर ऑपरेशन करने के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाने से पहले मरीजो को रखने के लिए निर्धारित प्री ऑपरेशन रूम नहीं है. वहीं ऑपरेशन करने के बाद ऑपरेशन थिएटर से निकलने के बाद मरीज रखने के लिए भी अलग से कोई पोस्ट ऑपरेशन रूम नहीं है. डिलेवरी रूम भी अमानक मिला था. जबकि नर्सिंग होम में के तहत इन गड़बड़ियों को ठीक किए लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है।
नोडल अधिकारी ने क्या कहा?
नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ पीके सिंह का कहना है कि हमारे द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया गया है. मेरे से पहले जो अधिकारी थे, उन्होंने लाइसेंस जारी किया था लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर जब लाइसेंस रिन्यूअल करना हुआ तब इतनी गड़बड़ी होने के बावजूद लाइसेंस कैसे रिन्यूअल कर दिया गया. आखिर में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी का कहना है कि जनहित को देखते हुए मापदंड में परफेक्ट नहीं आने के बाद भी हॉस्पिटल को लाइसेंस प्रदान किया गया है।
50 बिस्तर तक का लाइसेंस जारी
हैरानी की बात तो यह है कि तमाम खामियों के बीच नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल को 45 बेड से 50 बेड का लाइसेंस जारी कर दिया गया. ऐसे में नर्सिंग होम एक्ट की टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं. अंबिकापुर का यह अस्पताल पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है क्योंकि नगर निगम ने अस्पताल की बिल्डिंग को सबसे पहले अवैध घोषित कर दिया है क्योंकि बिल्डिंग का निर्माण नगर निगम के द्वारा जारी किए गए नक्शा के विपरीत किया गया है. वही इस बिल्डिंग का निर्माण आवासीय और कमर्शियल उपयोग के लिए किया जाना था लेकिन यहां अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया गया नगर निगम कमिश्नर ने इसे लेकर आदेश भी जारी किया हुआ है लेकिन फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
ट्रांसफार्मर लगाए जाने पर हुआ था हंगामा
अस्पताल के बाहर बिजली ट्रांसफार्मर लगाए जाने को लेकर कल खूब हंगामा हुआ मारपीट तक की नौबत आ गई. लोगों ने डॉक्टर की गाड़ी में तोड़फोड़ की, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि बिजली विभाग के अधिकारियों के द्वारा अब तक ट्रांसफार्मर को वहां से नहीं हटाया गया है जबकि नगर निगम कमिश्नर के द्वारा भी बिजली ट्रांसफार्मर को हटाए जाने के लिए कार्यपालन यंत्री बिजली विभाग को पत्र लिखा जा चुका है. दूसरी तरफ अस्पताल के पक्ष और विपक्ष में राजनीतिक दल के लोग दिखाई देने लगे हैं और यही वजह है कि प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं जबकि जांच व आदेश सब कुछ हो चुका है. वहीं स्थानीय लोग भी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं और इसकी वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति भी शहर में बिगड़ चुकी है।

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