मोदी की अपील के बाद बदला नेताओं का अंदाज, छोटे काफिले में पहुंचे मंत्री
रायपुर: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संसाधनों के सीमित उपयोग और ऊर्जा बचत की विशेष अपील की है। प्रधानमंत्री के इस आह्वान का व्यापक असर अब छत्तीसगढ़ में भी नजर आने लगा है, जहाँ मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल ने सादगी और बचत की अनूठी मिसाल पेश की है।
मुख्यमंत्री के काफिले में बड़ी कटौती
संसाधनों के संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सुरक्षा काफिले (कारकेड) में बड़ी कटौती की है। सामान्यतः बड़े काफिले के साथ चलने वाले मुख्यमंत्री आज केवल 4 गाड़ियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने पहुँचे। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में राज्य सरकार ई-वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) के उपयोग को प्राथमिकता देगी। बता दें कि इससे पहले वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी अपने प्रोटोकॉल वाहनों को कम करने का निर्णय ले चुके हैं।
एक ही गाड़ी में पहुँचे मंत्री, ई-रिक्शा का भी सहारा
बचत का यह संकल्प केवल मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रहा। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के काफिले से पायलट और अतिरिक्त गाड़ियों को हटा दिया गया और वह एक ही गाड़ी में बैठक स्थल पहुँचीं। वहीं, डिप्टी सीएम अरुण साव का काफिला भी पहले की तुलना में छोटा नजर आया; अब उनके साथ केवल दो सुरक्षा वाहन और एक मुख्य वाहन ही चल रहा है।
इस मुहिम में एक दिलचस्प तस्वीर तब देखने को मिली जब बीजेपी के प्रवक्ता स्वयं ई-रिक्शा में सवार होकर पार्टी कार्यालय पहुँचे, जो ऊर्जा बचत के संदेश को जनता तक पहुँचाने का एक प्रभावी जरिया बना।
प्रधानमंत्री मोदी का दूरदर्शी आह्वान
हाल ही में पीएम मोदी ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों को देखते हुए नागरिकों से अपील की थी कि वे निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का अधिक उपयोग करें। उन्होंने मेट्रो सेवाओं और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की बात कही ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को भविष्य की जरूरत बताते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कदम उठाने पर जोर दिया है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अपनाई गई यह पहल न केवल सरकारी खर्च को कम करेगी, बल्कि आम जनता के बीच भी ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करेगी।

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