सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा, ट्रांसफर अब पूरी तरह डिजिटल
जबलपुर। मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य और जिला स्तर पर कार्यरत शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए नई स्थानांतरण नीति 2026 की घोषणा कर दी है। विभाग के अवर सचिव सचिन्द्र राव के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी की गई इस नीति के अनुसार, पूरे सूबे में ट्रांसफर की खिड़की केवल 1 जून 2026 से लेकर 15 जून 2026 तक खुली रहेगी। इस 15 दिनों की निश्चित अवधि के बीत जाने के बाद वर्षभर सामान्य तबादलों पर पूरी तरह रोक रहेगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा और मंत्रालय सेवा के अफसरों पर प्रभावी नहीं होगा। इस बार सभी स्थानांतरण पूरी तरह डिजिटल और ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर के जरिए ही ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।
ई-ऑफिस से ही जारी होंगे आदेश; सीएम समन्वय और मंत्रियों को विशेष अधिकार
सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि 15 जून 2026 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद ई-ऑफिस प्रणाली में कोई भी ट्रांसफर ऑर्डर बैक-डेट या अन्य तरीके से निकाला जाता है, तो वह स्वतः ही निरस्त (शून्य) माना जाएगा। यदि कोई विभाग अपनी विशेष जरूरतों के लिए अलग नियम बनाना चाहता है, तो उसे सामान्य प्रशासन विभाग से सहमति के बाद मुख्यमंत्री समन्वय से मंजूरी लेनी होगी। प्रतिबंध की अवधि में केवल अत्यंत गंभीर परिस्थितियों जैसे— कैंसर, पैरालिसिस, हार्ट अटैक जैसी बीमारियां, अदालती आदेश, या लोकायुक्त/EOW/पुलिस में दर्ज आपराधिक मामलों में ही विभागीय मंत्री के प्रशासनिक वीटो से ट्रांसफर हो सकेंगे। निलंबन, रिटायरमेंट या पदोन्नति से खाली पदों को जनहित में भरा जा सकेगा।
कैडर के अनुसार तय हुआ मंजूरी का ढांचा; प्रभारी मंत्रियों की रहेगी अहम भूमिका
विभिन्न संवर्गों (कैडर्स) के लिए प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी का एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है:
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जिला स्तर: जिला संवर्ग और राज्य संवर्ग के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का जिले के भीतर ट्रांसफर जिला कलेक्टर के माध्यम से जिले के प्रभारी मंत्री की हरी झंडी के बाद ही हो सकेगा।
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प्रथम व द्वितीय श्रेणी: शासकीय उपक्रमों के प्रमुखों और प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के आदेश मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी होंगे। अन्य प्रथम और द्वितीय श्रेणी अफसरों के अंतर्जिला तबादले विभागीय मंत्री की अनुमति से होंगे।
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पुलिस महकमा: पुलिस विभाग में डीएसपी (DSP) और उनसे सीनियर रैंक के अफसरों के तबादले मुख्यमंत्री की मंजूरी से होंगे, जबकि कनिष्ठ पदों (सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल आदि) के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड निर्णय लेगा।
कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय हुआ कोटा; म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए अलग नियम
नई तबादला नीति में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संवर्ग में कुल स्वीकृत पदों के प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम सीमा (कैपिंग) तय की गई है:
स्वयं के खर्च (स्वैच्छिक) या आपसी तालमेल (म्यूचुअल) से ट्रांसफर चाहने वाले कर्मियों को विभागाध्यक्ष से सत्यापित ऑनलाइन आवेदन देना होगा, जिनके आदेश प्रशासनिक तबादलों से अलग सूची में जारी किए जाएंगे।
अतिशेष स्टाफ का होगा युक्तियुक्तकरण; 2 हफ्ते में कार्यमुक्त न होने पर रुकेगा वेतन
स्थानांतरण के दौरान खाली पदों को भरने में सबसे पहली प्राथमिकता अनुसूचित (ट्राइबल) क्षेत्रों को दी जाएगी, जहां कम से कम 3 साल की सेवाएं देना अनिवार्य होगा। जिन शिक्षण संस्थाओं या दफ्तरों में जरूरत से ज्यादा स्टाफ (सरप्लस) तैनात है, वहां सबसे जूनियर (कनिष्ठ) कर्मचारी को अतिशेष मानकर स्थानांतरित किया जाएगा, हालांकि महिला कर्मचारियों, 40% से अधिक दिव्यांगों और एक साल में रिटायर होने वालों को इसमें छूट मिलेगी। मान्यता प्राप्त संगठनों के पदाधिकारियों को भी नियुक्ति के बाद 4 साल तक राहत रहेगी। ट्रांसफर आर्डर जारी होने के अधिकतम दो सप्ताह के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त (रिलीव) होना होगा। तय समय के बाद पुराने स्थान से उनका वेतन आहरण बंद कर दिया जाएगा और ऐसा न होने पर इसे बड़ी वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।

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