हिसाब मांगने पहुंचे किसानों के बीच विवाद, सहायक सचिव पर बेसबॉल बैट से हमले का आरोप
भिंड| मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत सहायक सचिव को बंधक बनाकर उनके साथ की गई बेरहमी से मारपीट के मामले में अब एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। शुरुआती दौर में यह पूरा प्रकरण केवल मारपीट और प्रताड़ना का मामला प्रतीत हो रहा था, लेकिन अब स्थानीय किसानों ने इसके पीछे करोड़ों रुपये के कथित एमएसपी (MSP) फर्जीवाड़े और लाखों रुपये के भुगतान से जुड़े विवाद की पूरी परतें खोल दी हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि गेहूं खरीदी के नाम पर बड़ा घोटाला करके उनकी मेहनत की कमाई को रोक लिया गया था और लंबे समय तक भुगतान न मिलने के कारण आक्रोशित किसानों ने इस घटना को अंजाम दिया।
क्या है पूरा भुगतान विवाद और किसानों का आरोप?
पीड़ित किसानों के अनुसार, उन्होंने इस वर्ष लहार बस स्टैंड स्थित एमएसपी खरीदी केंद्र पर कुल 20 किसानों का लगभग 1,512 क्विंटल गेहूं बेचा था, जिसकी कुल बाजार कीमत करीब 38 लाख रुपये बनती थी। इसमें से किसानों को लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन शेष बचे 14 लाख 83 हजार रुपये का भुगतान आज तक नहीं किया गया। किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने बकाया पैसों के लिए सहायक सचिव विनोद सिंह राजावत से कई बार गुहार लगाई, तो वे लगातार उन्हें टालते रहे और झूठे आश्वासन देकर गुमराह करते रहे।
फर्जी किसानों के पंजीयन और सरकारी योजना के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
किसानों ने अपनी शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि आरोपी विनोद सिंह राजावत ने एमएसपी की भारी-भरकम राशि को हड़पने के लिए कागजों पर फर्जी किसानों के नाम से पंजीयन करा रखे थे। इस फर्जीवाड़े में उसने अपने निजी रिश्तेदारों के नामों का इस्तेमाल किया तथा अन्य किसानों की जमीनों पर भी फर्जी पंजीयन करवा लिए। आरोप यह भी है कि बिचौलियों के माध्यम से बाजार से कम कीमत पर सस्ता गेहूं खरीदकर उसे इन फर्जी किसानों के नाम पर एमएसपी केंद्रों पर खपाया गया, जिससे सरकारी योजना और राजकोष को भारी चपत लगाई गई।
पहले भी डेढ़ करोड़ की गड़बड़ी के लग चुके हैं आरोप
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी विनोद सिंह राजावत पर करीब एक साल पहले जब वह मछंड खरीदी केंद्र के प्रभारी के रूप में पदस्थ थे, तब भी लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की गेहूं खरीदी में वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोप लग चुके हैं। हालांकि, उन पुराने मामलों की सत्यता पुलिस और संबंधित प्रशासनिक विभागों की जांच का विषय बनी हुई है। कथित रूप से बकाया भुगतान न मिलने से बुरी तरह नाराज किसानों ने लहार में विनोद सिंह राजावत को घेर लिया। आरोप है कि उन्हें करीब 13 घंटे तक एक कार में बंधक बनाकर शहर में घुमाया गया और इस दौरान बेसबॉल बैट, प्लास्टिक पाइप, लात-घूंसों तथा थप्पड़ों से उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। इस अमानवीय मारपीट के दौरान उनके बेहोश हो जाने की भी बात सामने आई है।
पिस्टल दिखाकर कोरे कागजों और स्टाम्प पर हस्ताक्षर कराने का आरोप
पीड़ित सहायक सचिव का कहना है कि जब वे मारपीट के बाद होश में आए, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की नीयत से पिस्तौल (पिस्टल) दिखाई और जबरन तीन अलग-अलग चेक, पांच कोरे कागजों तथा 200-200 रुपये के दो स्टाम्प पेपरों पर उनके हस्ताक्षर करवा लिए। किसी तरह अपनी जान बचाकर वे आरोपियों के चंगुल से भागे और सीधे पुलिस थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
इस शिकायत के आधार पर लहार थाना पुलिस ने अजीत सिंह चौहान, वीर प्रताप सिंह, पवन गुप्ता और अभिनंदन सिंह समेत चार नामजद तथा दो अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। घायल पीड़ित 43 वर्षीय विनोद सिंह राजावत मूल रूप से बगियापुरा के रहने वाले हैं और वर्तमान में मछंड सेवा सहकारी संस्था में सहायक सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
फिलहाल स्थानीय पुलिस इस दोहरे मामले की बेहद गंभीरता और बारीकी से जांच कर रही है। एक तरफ पुलिस सहायक सचिव को बंधक बनाकर मारपीट करने और जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के आरोपों की जांच कर रही है, तो दूसरी तरफ किसानों द्वारा एमएसपी खरीदी में किए गए करोड़ों के फर्जीवाड़े और भुगतान गबन के गंभीर आरोपों की भी सघन पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संपूर्ण जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक और कानूनी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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